सन् 1730 में राजस्थान के खेजड़ली गाँव में अमृता देवी बिश्नोई एवं उनके साथ 363 बलिदानियों ने पेड़ों की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। उनकी स्मृति में अपना संस्थान द्वारा प्रतीकात्मक रूप से 363 पौधे लगाए गए।
यह आयोजन केवल वृक्षारोपण नहीं, अपितु पर्यावरण की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान की परंपरा को पुनः स्मरण करने का अवसर है।
