Apna Sansthan
Apna Sansthan
अमृतादेवी पर्यावरण नागरिक संस्थान

अपना संस्थान के बारे में

अमृतादेवी पर्यावरण नागरिक संस्थान

अपना संस्थान — गतिविधियों से झलकियाँ
माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः।— अथर्ववेद

पूर्व-पृष्ठभूमि — पर्यावरण संवर्धन संस्थान (2013-15)

अपना संस्थान की औपचारिक स्थापना से पूर्व, वर्ष 2013 में पर्यावरण संवर्धन संस्थान की स्थापना हुई। विभिन्न पर्यावरण-विशेषज्ञों व वरिष्ठ जनों के सहयोग से हुए इस प्रयास ने आगामी वर्षों में पौधारोपण की मात्रा-वृद्धि का आधार तैयार किया — 2013 में 12,000 पौधे, 2014 में 20,000, एवं 2015 में 48,000 पौधे रोपे गए।

स्थापना एवं शुभारंभ

वर्ष 2015 (वि.सं. 2072) में झांसी में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारी मण्डल की बैठक में पर्यावरण संरक्षण और संवर्द्धन पर पारित प्रस्ताव की क्रियान्विति में, संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल जी के राजस्थान प्रवास के दौरान सामाजिक सरोकार हेतु कुछ कार्य करने की प्रेरणा को ध्यान में रखकर, 3 जनवरी 2016 को किशनगढ़ (अजमेर) में अपना संस्थान की स्थापना की गई।

संस्थान का विधिवत शुभारंभ 6 मार्च 2016 को संघ के सरसंघचालक माननीय डॉ. मोहन भागवत द्वारा किया गया। उसी दिन संस्थापक सदस्यों ने खेजड़ली स्मारक (जोधपुर) की पवित्र यात्रा भी की — विस्तृत विवरण शुभारंभ एवं खेजड़ली यात्रा में देखें।

नाम का आधार — अमृता देवी विश्नोई का बलिदान

अमृता देवी विश्नोई बलिदान-चित्र — खेजड़ली स्मारक परिसर
खेजड़ली स्मारक (जोधपुर) पर रखा अमृता देवी विश्नोई बलिदान-चित्र — “To save trees, Bishnoi people sacrificed their lives in 1730 AD in village Khejarli, Jodhpur”

जोधपुर के समीप खेजड़ली ग्राम में सन्‌ 1730 में अमृतादेवी विश्नोई व उनकी तीन बेटियों सहित 363 लोगों द्वारा वृक्षों को बचाने के लिए किया गया बलिदान (सिर साठे रूख रहे तो भी सस्तो जाण)पर्यावरण संरक्षण का एक अद्भुत, अनुपम व प्रेरक उदाहरण है। उनकी स्मृति में ही संस्थान का नाम ‘अमृतादेवी पर्यावरण नागरिक संस्थान (अपना संस्थान) रखा गया है।

आज का कार्य-विस्तार

संस्थान वर्ष 2016 से राजस्थान में क्रियाशील है। प्रदेश में अब तक (2024) लगभग 1.66 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं। 1,300 से अधिक स्थानों पर सघन वन विकसित किए जाने के साथ ही लगभग 3,500 केंद्रों पर जल संरक्षण के कार्य भी प्रगति पर हैं।

हमारे नवाचार — मॉडल जो अपनाए जा रहे हैं

अपना संस्थान ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप कई सरल, कम-लागत एवं दोहराए-जा-सकने योग्य नवाचार विकसित किए हैं —

  • रसोई बगिया — लोहे के एक ड्रम में रसोई के कचरे से 13 पौधे, 10 साल तक कचरा बाहर नहीं फेंकना पड़ता।
  • पंछी ढाबा — पक्षियों के झूलने, दाना-पानी व आराम की व्यवस्था वाला "Restaurant of Birds"। भीलवाड़ा में 100+ पंछी ढाबे स्थापित।
  • अपना सघन वन (मियावाकी तकनीक) — 50 मीटर क्षेत्र में 51 प्रजातियों के 486 पौधे; 11 महीनों में 10-12 फुट ऊँचाई; सामान्य से 10 गुना तेज़ वृद्धि, 30 गुना घनत्व।
  • गोबर कंडों की होली — लकड़ी की जगह गोबर कंडों से होलिका दहन; प्लास्टिक-मुक्त परंपरा। (2018 — भीलवाड़ा)
रसोई बगिया 26वें ड्रम का लोकार्पण — भीलवाड़ा (28 जून 2020)
रसोई बगिया ड्रम लोकार्पण
मियावाकी तकनीक से अपना सघन वन — प्रताप नगर विद्यालय, भीलवाड़ा (23 जुलाई 2019)
मियावाकी सघन वन रोपण
गोबर कंडों की होली — पर्यावरण-अनुकूल होलिका दहन
गोबर कंडों की होली

जल संरक्षण — कुछ प्रमुख उदाहरण

भीलवाड़ा जिले में पिछले 15 वर्षों में 500 से अधिक स्थानों पर वर्षा-जल संचयन के सफल प्रयोग हुए। कुछ प्रलेखित उदाहरण —

  • रामस्नेही चिकित्सालय, भीलवाड़ा (2010) — सूखी बावड़ी में 1 लाख वर्गफुट छत का जल डालने से टैंकर भरवाना बंद; प्रतिवर्ष ₹2 लाख की बचत, बावड़ी में 5 फुट गहरा पानी सदैव।
  • पंचमुखी बालाजी मंदिर, भीलवाड़ा (2010) — 6 एकड़ तालाब का जल कुएं में उतारने से भूजल स्तर 70 फुट से 20 फुट पर आया।
  • मेवाड़ फर्टिलाइज़र, गांधीनगर भीलवाड़ा (2002) — 10,000 वर्गफुट मैदानी जल 3 बोरिंग में डालने से TDS 2000 से 600 पर; आधे किलोमीटर तक भूजल-स्तर 100 फुट से 5-10 फुट पर।
  • चैन कुंड बावड़ी, प्रतापगढ़ (5 जून 2017) — गौरी सोमनाथ मंदिर की सूखी बावड़ी साफ़ करने के 3 दिन में 15 फुट पानी आ गया।
  • उदय बाब, डूंगरपुर (2016) — महाकाल मंदिर के नीचे बावड़ी से प्रतिदिन करीब 8 लाख लीटर पानी नगर परिषद द्वारा वितरित।
  • चित्तौड़गढ़ — नगर परिषद द्वारा 7 बावड़ियों की सफाई; किले पर अन्नपूर्णा बावड़ी जन-सहयोग से कार-सेवा के माध्यम से।

*किसी भी मकान/संस्थान/औद्योगिक इकाई में वर्षा जल संरक्षण का खर्च अधिकतम ₹10-15 हज़ार; खेत/मैदान/जंगल में ₹5000 से भी कम — लाभ तत्काल एवं स्थायी।*

जन-जागरण एवं मेले

सामाजिक सरोकार और जन-जागृति के लिए संस्थान द्वारा समय-समय पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। भीलवाड़ा में भारतीय नववर्ष पर ‘अपना नव वर्ष अपना मेला 2018’ आयोजित किया गया, जिसमें 60 सामाजिक संगठनों सहित 50 हज़ार से अधिक लोगों की सहभागिता रही।

जनवरी 2025 में भीलवाड़ा में नगर निगम भीलवाड़ा के सहयोग से पांच-दिवसीय पर्यावरण मेला हरित संगम 2025 (10-14 जनवरी, चित्रकूट धाम) का आयोजन हुआ, जिसमें लगभग 1 लाख 70 हज़ार बंधुओं, माताओं-बहनों ने कार्यक्रमों का अवलोकन किया। मेले में योग शिविर, मांडणा प्रतियोगिता, "कचरे से कंचन" (इको-ब्रिक्स), स्केटिंग एवं सांस्कृतिक संध्याएँ शामिल थीं।

हरित संगम 2025 शुभारंभ — पुष्प-सज्जा के साथ गणमान्य अतिथि
हरित संगम 2025 का शुभारंभ — चित्रकूट धाम, भीलवाड़ा (10 जनवरी 2025)

राजस्थान शिक्षा एवं पंचायती राज विभाग के अमृत पर्यावरण महोत्सव (2024-) अभियान में भी पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के रूप में संस्थान सह-भागी है — पंजीकरण इको मित्रम ऐप के माध्यम से।

हमारी उपलब्धियाँ और इतिहास

हमारे उद्देश्य

  • जैविक कृषि, वर्षा जल संरक्षण
  • व्यापक पौधारोपण एवं सघन वन
  • पर्यावरण संरक्षण गतिविधि, अनुसंधान एवं संवर्द्धन
  • जल एवं पारिस्थितिकी विश्वविद्यालय की स्थापना करना
  • समस्त प्राकृतिक संसाधनों, विशेषतः पर्यावरण के संरक्षण तथा संवर्द्धन हेतु कार्य करना
  • प्राकृतिक संसाधनों से सम्बंधित प्रौद्योगिकी का प्रचार प्रसार करना
  • आम नागरिकों को जागरूक व प्रोत्साहित करने के लिए संगोष्ठियाँ, सेमिनार, कार्यशालाएँ तथा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना
  • जन सहयोग से अधिकाधिक वृक्षारोपण करवाना, जिससे ग्लोबल वार्मिंग के दुष्प्रभावों को कम किया जा सके
  • प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण और जल संरक्षण की विविध तकनीकों को बढ़ावा देना
  • भूमि, जल और वायु को प्रदूषित होने से रोकने के लिए आवश्यक प्रयास करना
  • स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत अभियान को सफल बनाने के लिए जन जागरण करना
  • हानिकारक प्लास्टिक व डिस्पोज़ल सामग्री का उपयोग न करने हेतु प्रेरित करना
  • हानिकारक रासायनिक खाद व कीटनाशकों के प्रयोग को कम/बंद कर जैविक कृषि, सामाजिक वानिकी, कृषि वानिकी और चारागाह संरक्षण को प्रोत्साहित करना
  • पारंपरिक व गैर-परंपरागत ऊर्जा स्रोतों के विस्तार हेतु आवश्यक प्रयास करना
  • औषधीय व फलदार पौधों का जन-सहयोग से अधिकतम रोपण, संरक्षण एवं विस्तार करना
  • उपरोक्त समस्त उद्देश्यों की पूर्ति के लिए सरकारी, गैर-सरकारी संस्थाओं व आमजन से सहयोग प्राप्त करना

Registration

रजि. क्र. 964/जयपुर/2015-16