अपना संस्थान की प्रेरणा से 23 जुलाई 2019 को प्रतापनगर स्कूल मैदान, भीलवाड़ा में जापानी मियावाकी तकनीक से सघन वन रोपण किया गया। कार्यक्रम का नाम रखा गया — "अपना सघन वन"। सम्बोधि समूह सहित स्थानीय टेक्सटाइल मिलों ने सौजन्य-सहयोग किया।

आँकड़े
- लगभग 50 मीटर क्षेत्र में 51 प्रजातियों के 486 पौधे रोपे गए।
- एक-एक से डेढ़ फुट ऊँचाई के फलदार एवं छायादार पौधे लगाए गए।
- मियावाकी तकनीक की विशेषता — 2 फुट चौड़ी व 30 फुट गहरी ट्रेंच में 100 से अधिक पौधे, सामान्य से 10 गुना तेज़ वृद्धि एवं 30 गुना अधिक घनत्व।
11 महीनों में 10-12 फुट ऊँचा वन
रोपण के 11 महीने बाद ही पौधे 10-12 फुट ऊँचाई पा गए — जो सामान्यतः 2 वर्षों में मिलती है। वन में पक्षियों की चौपाल भी विकसित हुई; छाया एवं पानी की व्यवस्था होने से सैकड़ों पक्षी यहाँ आबाद हुए।
प्रेरक श्री रामपाल अनहरा ने बताया कि परिजनों के साथ प्रातः-सायं प्रतापनगर स्कूल मैदान में घूमने जाते समय मियावाकी तकनीक की जानकारी मिली — और उसी दिन निर्णय लिया कि इसी तकनीक से पौधारोपण कराया जाए। श्री सोनू पाराशर ने सहयोग किया।

तकनीक के 6 फायदे
- कम खर्च में 30 गुना घना जंगल — 2 फुट चौड़ी ट्रेंच में 100+ पौधे
- 10 गुना तेज़ वृद्धि — 2 साल का काम 11 महीने में
- पम्प-लाइन द्वारा जल-संरक्षण — गर्मी में भी हरियाली बनी रहे
- जीवंतता — कम समय में पौधे सघन व स्वस्थ
- ऑक्सीजन बैंक — वन जलवायु को सुधारते हैं
- भूमि की जल-धारण क्षमता बढ़ती है
