होली 2018 (2 मार्च 2018) के अवसर पर अपना संस्थान ने भीलवाड़ा के अनेक मोहल्लों में एक अनोखी पहल की — लकड़ी की जगह गोबर कंडों से होलिका का निर्माण। गीली लकड़ी, प्लास्टिक एवं टायर जैसे विषैले तत्वों के प्रयोग का निषेध कर पारंपरिक गोबर कंडे, सूखे पत्ते एवं रंग-बिरंगी रंगोली के साथ होलिका सज्जा की गई।
रंगोली-युक्त कलात्मक होलिका
प्रत्येक मोहल्ले में अलग-अलग डिज़ाइन — इंद्रधनुषी रंगों से सज्जित गोबर-कंडों का टीला, ऊपर पतंगों का वृक्ष, फर्श पर विशाल रंग-रंगोली।

रात्रि में सज्जित होलिका — फूल-मालाओं एवं रिबनों से अलंकृत।

मोहल्ले-मोहल्ले में सहभागिता
हर मोहल्ले के परिवारों ने मिलकर होलिका तैयार की; बच्चों ने रंगोली बनाई, महिलाओं ने सज्जा की, पुरुषों ने कंडों का ढाँचा खड़ा किया।



इस प्रयोग ने प्लास्टिक-मुक्त होलिका की परंपरा को भीलवाड़ा में आगे बढ़ाने का मार्ग दिखाया — लकड़ी बचाने, प्लास्टिक जलाने से रोकने, एवं गोबर-कंडों के सात्विक धुएँ के स्वास्थ्य-लाभों को पुनः स्थापित करने का उदाहरण।
