अपना संस्थान द्वारा आयोजित पर्यावरण व वर्षा जल संरक्षण संगोष्ठी MLV टेक्सटाइल एवं इंजीनियरिंग कॉलेज, भीलवाड़ा में संपन्न हुई। यह संस्थान की तृतीय संगोष्ठी थी — प्रथम उदयपुर, द्वितीय जोधपुर, तृतीय भीलवाड़ा। कार्यक्रम का उद्देश्य विषय-विशेषज्ञों, प्रांत संयोजकों, विद्यार्थियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को एक मंच पर लाकर पर्यावरण संरक्षण व वर्षा जल संरक्षण पर विचार-विमर्श करना था।

मुख्य वक्ता एवं उनके विचार
डॉ. भगवती प्रकाश, कुलपति, पेसिफिक विश्वविद्यालय, उदयपुर
कजरी किचन गार्डन के बीजों के किट बाजार में उपलब्ध हैं, जिनसे घर की सब्ज़ियों की आपूर्ति संभव है। पुष्प देने वाले लगभग 3 लाख प्रकार के पौधे एवं 1.5 लाख प्रकार के कीट-पतंगे हैं जिनका आपसी समन्वय ही जैव-संवर्धन का आधार है। लगभग 20,000 प्रजातियाँ विलुप्ति के कगार पर हैं। ग्लोबल वार्मिंग के कारण पिछले 100 वर्षों में समुद्र स्तर 8 इंच बढ़ा है; सन् 2100 तक 4 फीट बढ़ने की संभावना है। प्रतिवर्ष 75,000 करोड़ टन कोयला थर्मल पावर प्लांट में जलता है — प्राकृतिक संपदा को सुरक्षित करना आवश्यक है।
श्रीमान विनोद मेलाना, सचिव अपना संस्थान
"यह तृतीय संगोष्ठी है। अपना संस्थान संघ प्रेरणा से स्थापित हुआ। दो वर्षों में 5 लाख से अधिक पौधारोपण किया गया। केवल 1 प्रतिशत पानी पीने योग्य है; अनुमान है कि 2025 तक आधी से अधिक जनता को पेयजल नहीं मिल पाएगा। रामसनेही चिकित्सालय व पंचमुखी बालाजी के खेत में जल संरक्षण किया गया। भीलवाड़ा के समस्त बेसमेंट में पानी भर आया है (भूजल स्तर इतना बढ़ गया है)।"

श्रीमान निम्बाराम, सह क्षेत्रीय प्रचारक, RSS
"पर्यावरण संरक्षण प्राचीन काल में आम जनता का सहज कार्य था। संबंधित विज्ञान भूलने के कारण सब कम हुआ। अब प्राकृतिक प्रकोप होने पर पुनः जागृति आ रही है। सबकी सहभागिता आवश्यक है।"
श्रीमान के.के. गुप्ता, डूंगरपुर (सभापति, नगर परिषद)
"भारत में प्रतिवर्ष गंदगी के कारण 25 लाख लोग मरते हैं (हैजा, मलेरिया आदि)। डूंगरपुर स्वच्छता में विश्व में प्रथम है। प्रत्येक व्यक्ति प्रतिदिन 421 ग्राम कचरा उत्पन्न करता है। डूंगरपुर में 34 सरकारी भवनों में जल संरक्षण किया गया। सभी स्कूलों के बच्चों को इनामी स्टीकर बाँटे गए।"
श्रीमान श्याम पालीवाल, पीपलांत्री
"3 माह में पीपलांत्री को शौच-मुक्त किया। राष्ट्रपति कलाम द्वारा पुरस्कृत सरपंच। बेटियों के नाम पर 111 पौधे लगाने की परंपरा — ₹21,000 की FDR बेटी के नाम। पानी का स्तर 10-12 फीट बढ़ा।"
श्रीमान अशोक जी, जयपुर प्रांत संयोजक
"अब तक 1 माह में 20,000 पौधे लगाए। 2 लाख का वार्षिक लक्ष्य। दहेज में 1,100 पौधे देने का आंदोलन शुरू किया गया है।"
श्रीमान धर्मपाल, चित्तौड़ प्रांत संयोजक
"हमारी प्राचीन संस्कृति प्रकृति-आधारित है। पंचवटी, नवग्रह वाटिका, नक्षत्र वाटिका ग्रह-नक्षत्रों के अनुसार फलदायक। मातृशक्ति पूजन वाटिका का प्रारंभ किया।"

श्रीमान आनंद चतुर्वेदी, प्राचार्य MLV टेक्सटाइल कॉलेज, भीलवाड़ा
"महाविद्यालय में 70-80 प्रतिशत बिजली बचाने का प्रोजेक्ट लगाने की योजना है।"
डॉ. हुकुम पाटीदार
"रसायनिक खाद से अनेक हानियाँ। विषैले पौधों से पक्षी-पशुओं की मौत। जैविक खाद से फसल सुधार व आय-वृद्धि। ₹80/kg क्वालिटी का गेहूँ उत्पादन।"
श्रीमान एस.पी. मेहरा
"विलुप्त प्रजातियों की सुरक्षा आवश्यक। मुनिया पक्षी Mount Abu में संरक्षित किया जा रहा है।"
श्रीमान निर्मल बरडिया, जोधपुर
"पशु-पक्षियों द्वारा प्रकृति संरक्षण मरुस्थल में स्वाभाविक रूप से होता है। तूंबा एक उदाहरण है। खेजड़ी का बीज खेत में डालने से नहीं उगता — पशु के गोबर से निकलने पर ही उगता है। बाजरा की खड़्डा पद्धति अधिक लाभकारी — एक पौधे में 100 सुट्टे तक संभव।"
श्रीमान खीमाराम, जोधपुर प्रांत संयोजक
"दो वर्षों में 2.5 लाख पौधारोपण, 70-80% सुरक्षित। क्लस्टर में 1,100-1,100 पौधे 4-5 स्थानों पर लगाए गए। ट्री गार्ड हेतु समिति से ₹51 लाख का सहयोग प्राप्त हुआ।"
श्रीमान गोविंद सोढाणी
"पिछले 4 वर्षों से पर्यावरण का कार्य भीलवाड़ा में किया जा रहा है (हमारे द्वारा)। 5 लाख पौधारोपण में से 70% सुरक्षित हैं।"
प्रेस कवरेज
संगोष्ठी के बारे में प्रमुख समाचार-पत्रों व पत्रिकाओं में विस्तृत कवरेज प्रकाशित हुई:

राजस्थान पत्रिका में पंचदिवसीय संगोष्ठी व विशेष वक्तव्यों पर लेख।

पाञ्चजन्य (22 जुलाई 2018) में डॉ. भगवती प्रकाश के जैव-विविधता संबंधी व्याख्यान पर आधारित लेख।

दैनिक भास्कर में स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर के.के. गुप्ता के विचारों पर लेख।
