इंदौर महानगर गत छह वर्षों से स्वच्छता स्पर्धा में पूरे देश में प्रथम आ रहा है। वहां की दो प्रेरक घटनाएं।
1- गोगा नवमी (जन्माष्टमी के दूसरे दिन) स्वच्छता प्रहरी एवं सेवा बस्ती के बंधुओं का विशाल जुलूस निकलता है। पर्याप्त पुष्प, गुलाल इत्यादि शहर में बिछ जाते हैं। उस दिन स्वच्छता कर्मी काम करने के लिए नहीं आ सकते हैं। इसलिए पूरा समाज रात्रि 8 बजे से पहले पूरे शहर को स्वच्छ करते है।
2-धूलंडी के दिन पूरे शहर में गुलाल की परत बिछ जाती है। उसी दिन संपूर्ण इंदौर शहर मिलकर के रात्रि 8 बजे से पूर्व शहर को साफ करते हैं।
वर्ष 2015 मे तत्कालीन कमिश्नर एवं वर्तमान जिला कलेक्टर श्रीमान मनीष सिंह जी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। निम्न प्रयास किए गए।
1 जनसहभागीता, एनजीओ, राजनीतिक इच्छा शक्ति व प्रशासनिक कुशलता सभी से मिलकर के संभव हो पाया।
2 सभी वरिष्ठ अधिकारी,सामाजिक, राजनीतिक कार्यकर्ता प्रत्यक्ष मैदान में प्रातः 6 बजे निरीक्षण के लिए निकलते। तब केवल 10% कर्मचारी ही मैदान में कार्य करते थे।
3 कचरा सेग्रीगेशन पर एनजीओ की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
4 माफिया वह असामाजिक तत्वों को उचित तरीके से समझाया गया।
5 आवारा पशुओं की व्यवस्था की गई।
6 कबाड़ी को अपने निर्धारित परिसर में ही काम करने के निर्देश दिए गए।
7 सम्मान समारोह द्वारा अच्छे कर्मचारी का सम्मान किया गया।
8 विवाह समारोह, होटल, रिसॉर्ट के कचरा निस्तारण की व्यवस्था अलग से की गई।
9 बर्तन बैंक चालू किए गए। ताकि डिस्पोजल काम में न आवे।
10 शहर की 600 किलोमीटर सड़क प्रतिदिन साफ की जाती है। जिसका ठेका एक निजी कंपनी को दिया है। यह कार्य रात्रि में करती है।
11 इंदौर शहर में प्रतिदिन 500 टन गिला एवं सूखा कचरा आता है। उसको उसी दिन छांट करके उसका निस्तारण किया जाता है।
12 विश्व के 40 देशों से प्रतिनिधि एवं भारत से लगभग सभी महानगरों के प्रतिनिधि, कमिश्नर, नगर पालिका अध्यक्ष, मेयर एवं कई एनजीओ यहां आ चुके हैं।
डूंगरपुर, राजस्थान छोटे शहरों में कई बार प्रथम आ चुका है। हम एक बार इन शहरों का भ्रमण करें। स्वच्छता में सर्वाधिक योगदान समाज का है।
स्वच्छता स्पर्धा में इंदौर की सफलता की प्रेरक घटनाएं
इंदौर महानगर स्वच्छता स्पर्धा में प्रथम आ रहा है। जनसहभागिता और प्रशासनिक कुशलता से गोगा नवमी और धूलंडी पर पूरा समाज शहर स्वच्छ करता है।









