पर्यावरण गतिविधि की प्रथम अखिल भारतीय बैठक, आगरा में 22 सितम्बर 2019 को, सह सरकार्यवाह, माननीय डॉक्टर कृष्ण गोपाल जी के प्रेरक मार्गदर्शन में संपन्न हुई। कार्यक्रम में तीन पुस्तकें 'पर्यावरण एक आत्मोत्सर्ग', 'पर्यावरण और भारतीय चिंतन' अपना संस्थान राजस्थान की प्रेरणा से और 'पर्यावरण भारती' और 'आओ पर्यावरण बचाएं' का विमोचन किया गया। 'रसोई की बगिया' का प्रदर्शन देहरादून के विभाग संयोजक श्रीमान कैलाश जी मेलाना ने किया। माननीय कृष्ण गोपाल जी ने बताया कि
संघ की गतिविधि के रूप में पर्यावरण गतिविधि अभी शैशव काल में है।
पहले चरण में हम कार्यकर्ताओं को पर्यावरण विषय की समझ होनी चाहिए।
अधिकतम खपत को विकास का मापदंड मानने की पाश्चात्य सोच का दुष्परिणाम है प्रदूषण।
संयम का भारतीय दर्शन विश्व मे स्वीकार्य रहा है।
अभी व्यक्तिगत रूप से अनेकों व्यक्ति और संगठन पर्यावरण बचाने में लगे हैं। ऐसे लोगों को जोड़कर इस काम को गति देनी है।
6 माह में सफल प्रयोगों को संकलित करके पुस्तक रूप में लाने का प्रयास कर जाएगा।
संघ शाखाओं के माध्यम से देश मे पर्यावरण संरक्षण के लिए विशाल जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
इस अभियान को छोटे ग्रामों तक ले जाया जाएगा।
सर्वप्रथम इस अभियान में पहले से जुड़े लोगों के अनुभव का लाभ लेने का प्रयास किया जाएगा।
इसके लिए संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करके कार्यकर्ता प्रशिक्षण करना है।
पर्यावरण संरक्षण में लगी संस्थाओं की सूची बनाना है।
ऐसे कार्यो में लगे स्वंयमसेवकों और विविध संगठनों के कार्यकर्ताओं की सूची बनाना।
स्वंयमसेवकों द्वारा संचालित स्वंयमसेवी संगठनों की सूची बनानी है।
इस दिशा में कार्य कर सकने में सक्षम संभावित समाज के कार्यकर्ताओं की सूची बनाना।
अपना विषय रखने में सक्षम कार्यकर्ताओं को जोड़ना।
पर्यावरण हित मे हमारा अपना घर चलना आरम्भ हो।
क्या हम स्वंयम पर्यावरण अनुकूल जीवन जीने को तत्पर हैं ?ये तय करना।
पर्यावरण संरक्षण हमारी परम्परा में है।
आसाम में वृक्ष को काटने से पहले वृक्ष से अनुमति मांगने की परम्परा है।
प्रकृति को मातृवत मानने का भाव फिर से जागृत करना होगा।
संसाधनों का उपभोग प्रसाद रूप में करना।
"तेरा तुझ को अर्पण"पर्यावरण गतिविधि का मूल मंत्र है।
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आगरा में पर्यावरण गतिविधि की प्रथम अखिल भारतीय बैठक
आगरा में पर्यावरण गतिविधि की बैठक डॉ. कृष्ण गोपाल के सानिध्य में हुई, जिसमें पुस्तकों का विमोचन व पर्यावरण संरक्षण पर चर्चा हुई।




