अपना संस्थान के 6 मार्च 2016 शुभारंभ के बाद प्रथम वर्ष (2016-17) में संस्थान ने भीलवाड़ा को केंद्र बनाकर संगठनात्मक, प्रशिक्षण एवं क्षेत्रीय पौधारोपण गतिविधियों की आधारशिला रखी।
भीलवाड़ा कार्यालय सक्रियण (20 जनवरी 2016)
शुभारंभ से पूर्व ही 20 जनवरी 2016 को भीलवाड़ा में संस्थान का कार्यालय सक्रिय किया गया। कार्यालय केंद्रीय वनौषधि संवर्धन संस्थान क्षेत्रीय कार्यालय के परिसर में ठहराया गया — जहाँ माधव गौ-विज्ञान अनुसंधान संस्थान एवं गौ-विज्ञान सामान्य ज्ञान परीक्षा गतिविधियाँ भी संचालित होती हैं।


क्षेत्रीय बैठकें एवं प्रबोधन (अप्रैल — जून 2016)
पर्यावरण-संरक्षण को घर-घर तक ले जाने के लिए 2016 के अप्रैल-जून में भीलवाड़ा व आसपास के गाँव-क्षेत्रों में अनेक कार्यकर्ता बैठकें आयोजित हुईं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों, प्रचारकों एवं पर्यावरण-प्रेमी नागरिकों ने संस्थान की दिशा व कार्ययोजना पर चर्चा की।


मानसून पौधारोपण अभियान 2016 एवं सामाजिक साझेदारी
जुलाई 2016 का मानसून संस्थान का प्रथम पूर्ण अभियान सिद्ध हुआ। स्थानीय नागरिक-संगठनों के साथ मिलकर पौधारोपण किए गए — जिनमें रोटरी क्लब भीलवाड़ा स्टार जैसी सामाजिक संस्थाओं का सक्रिय सहयोग रहा।

एक वर्ष की समीक्षा — पौधे जो पेड़ बने (मई 2017)
2016 के मानसून में रोपे गए पौधे 2017 की गर्मियों तक 10-15 फ़ुट तक बढ़कर छायादार वृक्ष बन गए। अमलतास जैसे वृक्ष पहले ही पुष्पित हो पूरे मोहल्ले को सुनहरी आभा दे रहे थे।

इन्हीं प्रयासों के आधार पर आगामी वर्षों में संस्थान ने भीलवाड़ा सहित दक्षिणी राजस्थान के 25+ केंद्रों पर जल-संरक्षण एवं पौधारोपण कार्यक्रम खड़े किए। शुभारंभ-दिवस का विस्तृत वर्णन शुभारंभ एवं खेजड़ली यात्रा (6 मार्च 2016) पर देखा जा सकता है।
